জ্যোতিষ ও তন্ত্রের প্ত্রিকা

Sunday, 4 March 2018

শনি মঙ্গল যোগ


ॐ शनी देवताये नमः न्याय के देवता राशि परिबर्तन जाने और
शनि-मंगल का अमंगल योग: दो माह दिन संभलकर रहें सभी राशि वाले ज्योतिष शास्त्र में शनि और मंगल दोनों को पाप ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में इनकी अशुभ स्थिति जिस भाव में होती है, उस भाव के फल को नष्ट करके व्यक्ति को परेशानियों में डाल देती है। शनि व मंगल परस्पर शत्रुता रखते हैं। इसीलिए यदि किसी कुंडली में ये दोनों ग्रह साथ-साथ हों, तो चाहे शुभ भावों में ही क्यों न बैठे हों, जीवन को कष्टकार बनाते ही हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि-मंगल की युति को द्वंद्व योग कहा गया है। इस साल शनि और मंगल की युति 7 मार्च से 2 मई 2018 तक हो रही है। इसलिए ये दो माहदिन न केवल प्रत्येक राशि के जातकों के लिए परेशानी भरे हो सकते हैं, बल्कि देश-दुनिया के लिए भी शनि-मंगल की युति भयानक युद्ध जैसे हालात भी पैदा कर सकती है। शनि पहले से ही धनु राशि में चल रहे हैं। 7 मार्च 2018 को सायं 6.30 बजे मंगल के भी धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही शनि-मंगल की युति बन जाएगी। मंगल इस राशि में 2 मई को सायं 4.18 बजे तक रहेगा। शनि-मंगल की युति शनि-मंगल की युति होने पर जीवन में अनेक घटनाएं आकस्मिक होती हैं, जिसके बारे में व्यक्ति को अंदेशा भी नहीं होता है। वैवाहिक जीवन, नौकरी, व्यवसाय, संतान, पारिवारिक सुख इनसे संबंधित शुभ-अशुभ घटनाएं जीवन में अचानक घटती हैं। अचानक विवाह जुड़ना, अचानक प्रमोशन, बिना कारण घर बदलना, नौकरी छूटना, कार्यस्थल या शहर-देश से पलायन आदि शनि-मंगल युति के आकस्मिक परिणाम होते हैं। चूंकि मंगल और शनि दोनों ही पापी ग्रह हैं इसलिए ये प्रत्येक जातक को प्रभावित करेंगे।
आइये चंद्र राशि के अनुसार जानते हैं किस राशि वालों के लिए इस युति का क्या परिणाम होगा सभी के जीवन पर होगा असर
मेष
राशि: इस राशि और लग्न वालों के लिए शनि-मंगल की युति नवम या धर्म स्थान में होगी। इस युति का असर मेष राशि वालों के स्वास्थ्य पर होगा, जिसके कारण स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ेगा। गुस्से पर नियंत्रण नहीं रखेंगे लेने के देने पड़ सकते हैं। नवम भाव दूरस्थ यात्राओं का भी भाव है। इसलिए बेवजह की यात्राओं में धन और समय नष्ट होगा। अचानक कोई बुरी खबर मिलने पर कहीं जाना पड़ सकता है। धार्मिक, आध्यात्मिक उन्नति रूक जाएगी और आप बुरी संगत में भी पड़ सकते हैं।
वृषभ राशि:
वृषभ राशि और लग्न वालों के लिए शनि-मंगल युति की युति अष्टम भाव में हो रही है। इस राशि के जातक अचानक किसी बड़े रोग के शिकार हो सकते हैं। वाहन चलाते समय अत्यंत सावधानी रखना होगी, वरना दुर्घटना और फ्रैक्चर वगैरह होने का अंदेशा रहेगा। मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग सावधानीपूर्वक करें, करंट लग सकता है। शनि-मंगल युति का असर आपकी निजी जिंदगी पर भी होगा। धैर्य और वाणी पर संयम रखते हुए परिवार के सदस्यों की बात सुनें और उनकी जरूरतों का ध्यान रखें।
मिथुन राशि:
इस राशि वालों के लिए सप्तम स्थान में शनि-मंगल युति हो रही है। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में कटुता बढ़ सकती है, लेकिन यहां यह बात अच्छी है कि यदि आप जीवनसाथी को प्रेम और सम्मान देंगे तो प्रेम में भी वृद्धि होगी क्योंकि मंगल आपकी आतंरिक ऊर्जा में वृद्धि करेगा। कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों को अचानक प्रमोशन मिलने के चांस हैं, लेकिन आपके समकक्ष लोग आपके प्रमोशन से जलकर आपकी प्रतिष्ठा और ईमानदारी को ठेस पहुंचा सकते हैं। गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने का प्रयास करेंगे कर्क राशि:
इस राशि और लग्न वालों के लिए छठे भाव में शनि-मंगल एक साथ आएंगे। यह रोग और शत्रु का स्थान है इसलिए सावधान, सतर्क रहें आपके गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने का प्रयास करेंगे। यदि आप बिजनेस करते हैं तो आर्थिक हानि के साथ आपकी प्रतिष्ठा को भी कुछ लोग नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोई नया कार्य प्रारंभ करना चाहते हैं तो योजनाएं सार्वजनिक न करें। नौकरीपेशा लोगों को भागदौड़ अधिक रहेगी। आपके स्वभाग में उग्रता रहेगी इसलिए स्थिति पर स्वयं नियंत्रण पाना होगा।
सिंह राशि:
इस राशि के लिए पंचम स्थान में शनि-मंगल साथ आएंगे। यह स्थान संतान, शिक्षा और प्रेम का स्थान है। यदि इस राशि वाले लोग किसी के प्रेम में पड़े हुए हैं तो सावधान रहें आप किसी धोखे का शिकार हो सकते हैं। आपका धन हड़पा जा सकता है। आर्थिक मामलों, संपत्ति की खरीदी-बिक्री में दस्तावेजों को पूर्ण एकाग्रता से पढ़कर ही कोई निर्णय लें। बिजनेस करते हैं तो किसी को बड़ा रूपया उधार देना आपको मुसीबत में डाल सकता है। कोर्ट, कचहरी, पुलिस के मामलों में फंस सकते हैं। प्रेम संबंध टूट सकते हैं। संतानपक्ष से अलगाव होने की संभावना है।
कन्या राशि:
कन्या राशि के जातकों के लिए चतुर्थ स्थान यानी सुख स्थान में शनि-मंगल के साथ बैठकर सुखी जीवन को बिगाड़ सकते हैं। पारिवारिक जीवन में कष्ट बढ़ेंगे। जीवनसाथी, संतान, भाई-बहनों, माता-पिता से विवाद होगा। सुखों में कमी आएगी। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा। धन की कमी से काम अटक सकते हैं। 2 मई तक आपको प्रत्येक निर्णय खासकर आर्थिक फैसले बहुत सोच-समझकर ही लेना होंगे। किसी को उधार न दें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। आपकी प्रतिष्ठा को हानि
तुला राशि:
इस राशि और लग्न के लिए तीसरे भाव में शनि-मंगल युति हो रही है। इनके लिए मिलाजुला असर रहेगा। कई छोटी-मोटी परेशानियों से घिरे रहेंगे। कभी अचानक कहीं से अच्छा पैसा आ जाएगा, तो कभी अचानक ज्यादा पैसा चला भी जाएगा। बीमारियों पर खर्च होने की आशंका ज्यादा है। परिवार के किसी सदस्य, भाई-बहन को अचानक स्वास्थ्य संबंधी बड़ी परेशानी आ सकती है। संयम से काम लेना होगा। आपके लिए अच्छी बात यह है कि पैसों की व्यवस्था खुद-ब-खुद हो जाएगी,आपको भटकना नहीं पड़ेगा। वृश्चिक राशि:
चूंकि यह मंगल की ही राशि है और धन स्थान यानी दूसरे भाव में शनि-मंगल की युति हो रही है, इसलिए मंगल तो इनके लिए शुभ रहेंगे लेकिन शनि दोगुना नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। यदि कोई प्रॉपर्टी खरीदना चाह रहे हैं तो दो माह दिन कोशिश करें कि ना खरीदें। अति उत्साह में किया गया कार्य तकलीफदेह साबित होगा। पारिवारिक जीवन में भी मतभेद होगा। संपत्ति को लेकर विवाद होगा। शत्रु सक्रिय रहेंगे। कोई आपका अपना ही आपकी प्रतिष्ठा को हानि पहुंचा सकता है।
धनु राशि:
इस राशि में ही शनि-मंगल की युति हो रही है। इसलिए सबसे ज्यादा धनु राशि के जातक प्रभावित होंगे। इस राशि का स्वामी गुरु है इसलिए जीवन में बड़े द्वंद्व की स्थिति रहेगी। अचानक आई मुसीबतों में खुद को संभालने की आवश्यकता होगी। जीवन में बहुत सी चीजें उथल-पुथल हो जाएंगी। प्रेम संबंध टूटेंगे। दांपत्य जीवन में दिक्कत आएगी। आर्थिक संकट, मान-सम्मान, पद में कमी आएगी। व्यापारियों को हानि उठाना पड़ेगी। नौकरीपेशा व्यक्तियों का प्रमोशन अटक सकता है। मकर वालों का भाग्य साथ नहीं देगा
मकर राशि:
इस राशि वालों के लिए द्वादश भाव यानी व्यय स्थान में शनि-मंगल बैठकर खर्च अधिक करवाएंगे। व्यर्थ के कार्यों पर धन खर्च होगा। इस दौरान भाग्य आपका साथ नहीं देगा। आपका स्वभाग उग्र हो जाएगा इसलिए विवाद भी अधिक होंगे। परिवारजनों के साथ सामंजस्य बनाकर रखेंगे तो कई परेशानियों से बच जाएंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा। वाहन-मशीनरी का उपयोग करते समय सावधानी रखें। नई प्रॉपर्टी और वाहन खरीदने की बात अभी दो महादिन भूल जाएं। इतनी सब परेशानी आने के बावजूद इस राशि वालों को प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि आगे चलकर अभी की कोशिशें रंग लाएंगी।
कुंभ राशि:
इस राशि वालों के लिए शनि-मंगल का मिलन एकादश भाव यानी आय स्थान में होगा। इनके लिए शुभ संकेत यह है कि अचानक कहीं से भारी मात्रा में पैसा आ सकता है। या तो कोई रूका हुआ या फंसा हुआ पैसा आपको मिलेगा। संपत्ति खरीदने के योग भी बन रहे हैं, लेकिन ध्यान रखें अच्छी तरह सोच-विचारकर ही कदम बढ़ाएं। नया बिजनेस प्रारंभ करना चाहते हैं तो अभी रूक जाएं। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह युति ठीक नहीं कही जा सकती। स्वयं, माता-पिता या संतान को कोई बीमारी आएगी।
मीन राशि:
इस राशि वालों का दशम स्थान शनि-मंगल प्रभावित करेंगे। यह स्थान बिजनेस, नौकरी, प्रमोशन, सरकारी जॉब आदि का स्थान है। ये सभी काम युति के कारण अटकेंगे। कुछ काम चलते-चलते अचानक अटकेंगे। जिन युवाओं की सगाई हो गई है, वह टूट सकती है। मानसिक तनाव बना रहेगा। इससे स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है। मन को शांत रखते हुए जो जैसा चल रहा है उसे चलने दें, कुछ नया करने की कोशिश बिल्कुल न करें। अन्यथा परेशानियां बढ़ सकती हैं। यह बृहस्पति की राशि है इसलिए कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे आप अपमानित महसूस करें।
एक समय ऐसा आता है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने रोजगार के बारे में चिंतित होता है कि कौन सा व्यवसाय या कौन सी नौकरी की जाए जिससे जीवन अच्छे ढंग से गुजरे ,भारतीय ज्योतिष इस मामले में आपका मार्गदर्शन कर सकता है, आपके जन्म नक्षत्र के अनुसार आपको कौन सा व्यवसाय करना चाहिए इसके बारे में आपको बताया जा रहा है
(1)- अश्वनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए पुलिस,सेना, न्यायालय,रेलवे की नौकरी,योग प्रशिक्षण,शल्य चिकित्सक,इस्पात, लोहा, तांबा से संबंधित नौकरी या व्यवसाय करना लाभदायक रहता है
(2) - भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए सिनेमा,खेलकूद, संगीत,विज्ञापन, आभूषण, ऑटोमोबाइल्स, खाद,चाय या काफी के बागान, होटल,अपराध विशेषज, अधिवक्ता,चर्म उद्योग, भवन निर्माण, शल्य चिकित्सक,नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि व्यवसाय या नौकरी में लाभ कमा सकते हैं
(3) - कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति है सेना, पुलिस,चिकित्सा, रक्षा विभाग,रसायन उद्योग, भूमि भवन एवं एवं पैतृक संपत्ति से, विस्फोटक पदार्थ निर्माण से अग्नि से संबंधित व्यवसाय, माचिस ,लोहा, स्टील, पीतल , पंडित या ज्योतिषी,की नौकरी या व्यवसाय में लाभ कमा सकते हैं
(4) - रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति होटल, पेट्रोल, तेल,दूध डेरी, आइसक्रीम, कांच,प्लास्टिक, साबुन, सेंट,एसिड,तरल पदार्थ, नौसेना,गन्ना, दवाइयां,जलीय पदार्थों से संबंधित, विवाह ब्यूरो, कृषि, प्रॉपर्टी डीलिंग, ललित कला, न्यायधीश और वकील आदि व्यवसाय या नौकरी से अच्छा लाभ कमा सकते हैं
(5) मृगशिर नक्षत्र में जन्म लेनेवाले व्यक्ति भूमि भवन,संगीत,प्रदर्शनी, दर्जी का कार्य, खाद, चांदी, प्लैटिनम, खाल वा हड्डियां, मिठाई, पशुचिकित्सक, पशुपालन विभाग, गाड़ी रिक्शा, टैक्सी,ड्राइवर,फल,वस्त्र हीरे,मुंगा,वेसलीन,टेलकम पाउडर, चंदन, तेल,मंजन,चलचित्र,फोटोग्राफी, विवाह मंडप, आयकर, विक्रय, मशीनरी, रेडीमेड गारमेंट,फूल विक्रेता,जासूसी,ऑडिटर,शिक्षक, भवन निर्माण ठेकेदार,आदि कार्य करके भरपूर लाभ उठा सकते हैं
(6) आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति डॉक्टर, यातायात, लेखन एवं विज्ञापन,अनुसंधानकर्ता, अविष्कार, दवा विक्रेता,भौतिकी एवं सांखिकीय, भविष्यवक्ता, हस्तरेखा, हस्ताक्षर विशेष्ञ,कारीगर,तांत्रिक ओझा या जादूगर, आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(7) पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पत्रकार, संपादक, प्रकाशक, निरीक्षके ,कहानी लेखक ,बीमा, विज्ञापन ,दलाली ,ज्योतिष व गणित से संबंधित व्यवसाय,धार्मिक व कानूनी साहित्य के अनुवादक, कवि, लेखाकार, न्यायधीश, इंजीनियर, प्रवक्ता,सलाहकार, पोस्टमैन, सचिव, दंत विशेष,उदघोषक, राजदूत, ऊनी वस्त्र विक्रेता, दुभाषिया ,ग्राम प्रधान आज व्यवसाय से धन अर्जन कर सकते हैं
(8)- पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति तेल, पेट्रोल, कोयला,पेट्रोल पंप, वन विभाग,कृषि विभाग, कुंआ नाहर तालाब सुरंग खुदाई एवं निर्माण, रात्रि चौकीदार रात्रि के अन्य कार्य,जेलर, न्यायधीश भूमिगत कार्य एवं जलीय कार्यों से संबंधित व्यवसाय या नौकरी करके लाभ कमा सकते हैं
(9)- आश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति दलाली से संबंधित कार्य विक्रय प्रतिनिधि,कलाकार, संगीतकार,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, पत्रकार,लेखक, टाइपिस्ट,लेखाकार, ऑडिटर,दुभाषिया,राजदूत,गाइड, नर्स,ज्योतिषी,गणितज्ञ,जल विभाग, वस्त्र निर्माण, ठेकेदार, फ्रूट ,कागज यानी स्टेशनरी आदि व्यवसाय या नौकरी से धन उपार्जन कर सकते हैं
(10)- मघा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति,उद्योगों का ठेकेदार, रासायनिक दवा उत्पादक, अपराध विशेषज्ञ, रक्षा सेवा, शल्य चिकित्सक, चिकित्सा विभाग, विद्युतपालीस,शस्त्र निर्माण,आदि व्यवसाय से या नौकरी में धन लाभ कमा सकते हैं
(11)- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति यातायात विभाग, वीडियो संगीत, सिनेमा, थिएटर, होटल ,रेस्टोरेंट ,कैंटीन ,शुद्ध शहद, नमक ,ऑटोमोबाइल, पुरानी एवं कलात्मक वस्तुओं का व्यवसाय खेलकूद, पशु चिकित्सा, पशुपालन, रति रोग विशेषज्ञ,शिक्षाविद,चश्मे के कांच,सिगरेट के निर्माता, कन्या विद्यालय में नौकरी ,राजस्वविभाग, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं शल्यचिकित्सक आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(12) - उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति राज्य सेवा, चिकित्सा, रक्षा,नौसेना,जलयान, उद्योग व्यापार, हृदयरोग य स्त्री रोग विशेषज्ञ, पत्रकार ,जनसंपर्क,खगोल शास्त्री ,हस्तलेख विशेषज्ञ ,टेलीफोन विभाग ,हृदय रोग ,नेत्र रोग विशेषज्ञ दवा विक्रेता ,आदि नौकरी या व्यवसाय में लाभ कमा सकते हैं
(13) - हस्त नक्षत्र मैं जन्म लेने वाले व्यक्ति डाक तार विभाग,संदेशवाह, सूती वस्त्र,सूती उद्योग, बांध ,नाहर ,व सुरंग निर्माता, कलाकार, चित्रकार, राजनयिक, राजदूत ,वकील, आयात-निर्यात ,आदि नौकरी या व्यवसाय से अच्छा धन कमा सकते हैं
(14) - चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति, प्रकाशन ,लेखन ,मुद्रण, भवन के ठेकेदार, दलाल, यातायात पुलिस, रक्षा सेना,विक्रीकर, आयकर, राजस्व, वित्त विभाग,विद्युत, खान,मकैनिक, इंजीनियर, जेल विभाग, अपराध विशेषज्ञ,फिंगर प्रिंट विशेषज, बुनकर इत्र विक्रेता आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(15) - विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति ,पर्यटन विभाग, विदेशियों से संपर्क द्वारा लाभ,जल एवं वायु, यात्रा ,धावक ,विदेशी व्यापार, बागान, राजस्वविभाग, चलचित्र विज्ञापन, अभिनय,खान, प्रकाशक ,संपादक न्यायधीश, ऑडिटर, प्राचार्य, व्याख्याता,रसायन एवं दवा निर्माण, बीमा, बैंक,आदी व्यवसाय एवं नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(17) - अनुराधा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति, उत्खनन इंजीनियर, कोयला,तेल, पेट्रोल ,कच्ची धातु ,दवा निर्माता, शल्य चिकित्सा,होंयोपैथी, अपराध विशेषज्ञ,वाद्ययंत्र,चमड़े हड्डियां वह उन वस्त्रों के व्यापारी, दंत विशेषज्ञ,खाद्य तेल निर्माता,न्यायधीश, जलसेवा, अभिनेता,गुप्त विद्याओं से आए,आदि व्यवसाय एवं नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(18)- जेष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति, प्रकाशन ,मुद्रण, स्याही, कैलकुलेटर, केवल निर्माता,विज्ञापन, सूती वस्त्र उद्योग, वायलर विक्रेता, रसायनिक इंजीनियर,बांध, खुदाई बीमा, चिकित्सा,सेना, डॉक्टर, जेल विभाग आदी,व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(19)- मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति ,वेद ,यज्ञ ,ज्योतिषी, पुरोहित, मौलवी ,पादरी ,कथावाचक ,शिक्षक, राजदूत ,सचिव, दुभाषिया, ,चिकित्सक, वैद्य ,जड़ी-बूटी व औषधि विक्रेता,सलाहकार, सामाजिक कार्यकर्ता ,वकील, न्यायधीश ,सलाहकार ,राजनेता, संपादक, ग्राम मुखिया आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(20) - पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति ,वकील, न्यायधीश, बैंक निदेशक, पशुपालन विभाग ,समाज कल्याण विभाग, रेलवे विभाग, वायु यातायात, रेशम ,नर्सरी ,संगीत, चलचित्र ,होटल व्यवसाय ,स्वास्थ्य केंद्र ,आयुर्वेदिक दवाइयां ,अंतरराष्ट्रीय व्यापार आदि नौकरी या व्यवसाय से धन लाभ कमा सकते हैं
(21) - उत्तरा आषाढ नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति ,शिक्षा,धर्म,न्यायधीश, बैंक,राजदूत, जेल विभाग,कस्टम विभाग, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, आयुर्वेदिक, दवाइयां, सैनिक,पहलवान, घुड़सवार, भूमिगत व्यवसाय, खान कोयला,वित्त विभाग,वैज्ञानिक, आयकर विभाग, अनुसंधान,पुरातत्व विभाग, आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(22) - श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति,आइसक्रीम, फ्रिज,कूलर, वाहनचालक, रात्रि में भूमि गत कार्य करने वाले,खान,तेल,केरोसिन, पेट्रोल, पेट्रोल पंप,कोयला,कुएं,तालाब,नहर, सुरंग, सिंचाई विभाग,मछुआरा, कृषक,नर्स,मदारी,आदि व्यवसाय से धन लाभ कमा सकते हैं
(23) - धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति,आयुर्वेद,होम्योपैथी,अस्थि विशेषज्ञ, भूमिगत कार्य,जस्ता,सीमेंट, सीसा, शराब, दूरदर्शन, दूरभाष, अणुशक्ति,अनुसंधान केंद्र,पुलिस, पोस्टमार्टम विभाग आदि नौकरी या व्यवसाय से धन कमा सकते हैं
(24) - शतभिषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति, ज्योतिष,खगोल शास्त्रीय, विद्युत,वायु यातायात तकनीशियन, चर्म उद्योग जेल विभाग, दुभाषिया अनुवादक, गुप्त विद्या आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(25) - पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेनेवाले व्यक्ति,गणित्ञ,ज्योतिष, पंचायत,शेयर दलाल,राजस्व, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, cid विभाग, बीमा,वायुयान, दवाई संबंधी व्यापार या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(२६)- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति,नहर,तालाब की खुदाई,जेल विभाग, सेना,अस्पताल, क्लब,बीमा,आयात निर्यात बंदरगाह पर नौकरी,छतरी,रेनकोट बनाने का काम तेल,मत्स्यपालन,नौकायन, सैनिक, राजनायिक,आदि व्यवसाय या नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैं
(27) - रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति,संदेशवाहन,रेडियो,टेप रिकार्ड, से संबंधित व्यवसाय, प्रकाशन संपादन,धार्मिक एवं कानूनी साहित्य के लेखक,विज्ञापन,शिक्षण, न्यायधीश, ऑडिटर,ज्योतिषी,गणित विशेष,बैंक कर्मचारी,अंतरराष्ट्रीय व्यापार,टकसाल,वकील,फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ आदि व्यवसाय एवं नौकरी से धन लाभ कमा सकते हैगोचर कुंडली फलादेश
ज्योतिष में भचक्र की किसी राशि विशेष में ग्रह के जाने का नाम गोचर है | 'गो' का मतलब है ग्रह जो जाता है| 'चर' का मतलब है 'गमन' संचार | इसलिए दिनानुदिन आकाश में जो ग्रह जाते हैं तब उस राशि में गोचरवश ग्रह हुआ, यह कहते है जन्म-चक्र स्थिर है | इसमें ग्रहों की स्थिति जन्मकाल में है, परन्तु ग्रह स्थिर नहीं है, चलते रहते हैं | इसलिए जब जहाँ जाते हैं वहां पर उनकी स्थिति कही जाती है |
भचक्र में ये चलते रहते हैं और चक्र को पूरा करने पर फिर उसी मार्ग में दुबारा जाते हैं |इसलिए जब हम गोचर विचार कहते हैं तो जन्मकालिक ग्रह की स्थिति और ग्रह कहाँ जा रहे हैं, दोनों का ही विचार करते हैं |गोचर कुंडली फलादेश करते समय निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए -
१. ग्रह जब जन्म राशि से अथवा लग्न से बारहवें स्थान में जाते हैं तो अत्यधिक व्यय करते हैं, विशेष तौर पर उस समय जब दो या तीन ग्रह बारहवें स्थान में जाते हों|क्रूर ग्रह अधिक व्यय करते हैं | शुभ ग्रह अच्छे कार्यों में जैसे की विवाह, धर्म इत्यादि में व्यय करते हैं |
२. सूर्य, बुद्ध और शुक्र बारह राशियों का भ्रमण एक वर्ष में पूरा कर लेते हैं | ये ग्रह प्रायः एक राशि में एक मास तक रहते हैं | यदि जन्म के समय कोई ग्रह राशि में बलवान हो (अपने उच्च, मित्र अथवा अपनी ही राशि में) और किसी शुभ स्थान में भी बैठा हो तो गोचर में यदि वह किन्हीं अशुभ भावों में जाएगा तो भी उसका अधिक बुरा फल नहीं होगा |
यही फल उस समय भी समझना चाहिए जब ग्रह (जिसके गोचर का विचार किया जा रहा हो) अच्छे भाव का श्वामी हो या जन्म कुंडली में योगकारक हो |
३. यदि कोई ग्रह राशि ओर भाव में भी बलवान हो तो जब गोचर में शुभ स्थानों से जाता है तो अत्यधिक शुभ फल देता है |
४. यदि कोई ग्रह कमजोर हो (राशि और नवांश में नीच का हो या किसी शत्रु की राशि और नवांश में हो) और किसी क्रूर ग्रह के साथ बैठा हो या दृष्ट हो और उसपर किसी शुभ ग्रह की युति या दृष्टि न हो अथवा अशुभ स्थानों का श्वामी हो, अस्त हो तो गोचर में वह शुभ स्थानों में जाता हुआ भी विशेष शुभ फल नहीं देगा |
५. गोचर में यदि किसी ग्रह का क्रूर ग्रहों से योग हो या उसपर क्रूर ग्रहों की दृष्टि पड़े, तो गोचर में जाते हुए ग्रह का अच्छा फल कम हो जाता है और बुरा फल बढ़ जाता है| यदि कोई ग्रह गोचर में अस्त हो या अपनी नीच राशि या नीच नवांश में हो तो उसका भी इसी प्रकार फल होता है|
६. गोचर में जब किसी ग्रह का किसी शुभ ग्रह से योग होता है अथवा उसपर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पड़ती है तो तो उस गोचर में जाते हुए ग्रह का अच्छा फल बढ़ जाता है और ख़राब फल कम हो जाता है|
उदाहरण के लिए मंगल यदि तीसरे स्थान में जा रहा हो और उसी समय शुक्र अथवा गुरु भी वहां जाएँ तो मंगल के शुभ फल को बढ़ाएंगे| इसके अलावा यदि मंगल नवम स्थान से जा रहा हो और उसपर गुरु की द्रष्टि पड़े तो मंगल का अशुभ फल कम हो जायेगा|
७. जब कोई ग्राह अपनी उच्च राशि या अपनी स्वयं की राशि या अपने नवांश या उच्च नवांश में से जाता है तो उसका अच्छा फल बढ़ता है और ख़राब फल कम हो जाता है
उदाहरण के लिए शनि के साढ़े सात वर्ष (साढ़े साती) ख़राब मानी गई है, परन्तु कन्या राशि वाले के लिए अंतिम ढाई वर्षों में शनि तुला में आयेगा| तुला राशि शनि का उच्च स्थान है इसलिए वहां पर शनि अधिक पीड़ा नहीं देगा|
८. शुभ ग्रह गोचर में जब वक्री होते हैं तो अधिक शुभ फल देते हैं| क्रूर ग्रहों के वक्री होने पर अत्यधिक अशुभ फल होता है|
९. सबसे अधिक शुभ अथवा अशुभ प्रभाव उस समय होता है जिस समय दो या अधिक ग्रह गोचर में वक्री हो जाएँ (शुभ ग्रह अथ्वा क्रूर ग्रह)
१०. क्रूर ग्रह अशुभ स्थानों में जाते हुए ज्यादा बुरा फल देंगे यदि जिस राशी में वे जा रहे है उस राशि में जन्म के समय कोई ग्रह बैठा हो तो भी अच्छा फल देते हैं|
उदहारण के लिए गुरु चौथे स्थान में जा रहा हो जहाँ सूर्य भी जन्म के समय है तो जिस समय गुरु सूर्य पर से जायेगा तो सूर्य अच्छा फल देगा जैसे उच्च स्थान, नए मित्र, नया कार्य, पिता का या स्वयं का धन इत्यादि|
१२. यदि जन्म के समय किसी भाव पर शुभ ग्रहों की द्रष्टि हो तो गोचर में क्रूर ग्रह भी उस भाव में जाते हुए बहुत बुरा फल नहीं देंगे|
१३. जन्म के समय लग्न में बैठा हुआ ग्रह गोचर में जिस भाव में जायेगा उस भाव का फल देगा|
१४. जो अच्छा या बुरा फल ग्रह जन्म-कुंडली में बताता है वह फल उस समय होगा जब ग्रह लग्न में ले जा रहा हो|
१५. गोचर विचार में सूर्य और मंगल प्रथम १० अंश के भीतर, गुरु और शुक्र १० से २० अंश के भीतर तथा बुध सम्पूर्ण राशि में अपना फल देते हैं|
१६. यह गोचर में किसी प्रकार का अच्छा या बुरा फल देगा यह इस बात पर निर्भर करता है की वह ग्रह जन्म-कुंडली में-
(अ) किन भावों का स्वामी है ?
(ब) किस स्थान में बैठा हुआ है ?
(स) किस वस्तु का कारक है ?
(द) गोचर में किस भाव में जा रहा है ?
यहाँ भाव का विचार जन्म राशि से, जन्म लग्न से तथा ग्रह के मूल स्थान से करना चाहिए |मे भावानुसार उच्च का सूर्य शेष भाग
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कुंडली के सातवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसाय तथा व्यापार से संबंधित शुभ फल दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक व्यापार के माध्यम से धन कमा सकते हैं। कुंडली के सातवें घर में शुभ उच्च का सूर्य जातक को धनी, बुद्धिमान तथा सहायक पत्नि भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते ऐसे कुछ जातकों का पूर्ण भाग्योदय विवाह के पश्चात ही हो पाता है तथा इन जातकों की पत्नियां इनके जीवन में धन, समृद्धि एवम सुख लेकर आतीं हैं। कुंडली के सातवें घर में शुभ उच्च का सूर्य जातक को विदेशों में भी स्थापित करवा सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक स्थायी तौर पर ही विदेशों में बस जाते हैं तथा वहां पर बहुत धन कमाते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के सातवें घर में स्थित उच्च का सूर्य अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके कारण इस अशुभ प्रभाव से पीड़ित कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण तथा कष्टप्रद हो सकता है तथा इन जातकों को वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं हो पाता। कुंडली के सातवें घर में अशुभ उच्च का सूर्य जातक को आर्थिक हानि से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से धन हानि उठानी पड़ सकती है जबकि ऐसे कुछ अन्य जातकों को बहुत अधिक धन व्यय करने वाली पत्नियां मिल सकतीं हैं जो इन जातकों का सारा धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च करती रहतीं हैं।
आठवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को विदेश में स्थापित करवा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के उच्च सूर्य के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक स्थायी तौर पर विदेश में ही बस जाते हैं तथा वहां पर सफलता प्राप्त करते हैं। कुंडली के आठवें घर में शुभ उच्च का सूर्य जातक को पराविज्ञान तथा आध्यात्म से संबंधित गहन रूचि तथा विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के शुभ उच्च सूर्य के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक इन क्षेत्रों में गहन रूचि रखते हैं तथा शोध करते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी विषय को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना लेते हैं तथा ऐसे जातक ज्योतिषी, हस्त रेखा विशेषज्ञ, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, जादूगर, जादू टोना करने वाले, तांत्रिक, मांत्रिक अथवा आध्यात्मिक साधक हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के आठवें घर में स्थित उच्च का सूर्य अशुभ होने की स्थिति में जातक के स्वास्थ्य तथा आयु पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस प्रकार के अशुभ उच्च सूर्य से पीड़ित कुछ जातकों की आयु सामान्य से कम अथवा बहुत कम भी हो सकती है। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ उच्च का सूर्य जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव से पीड़ित कुछ जातकों के एक अथवा एक से भी अधिक विवाह टूट भी सकते हैं। इस प्रकार का अशुभ उच्च सूर्य जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों के माध्यम से भी पीड़ित कर सकता है तथा इनमें से कुछ जातक तो किसी घातक अर्थात जानलेवा रोग से भी पीड़ित हो सकते हैं जो इन जातकों को बहुत लंबे समय तक कष्ट देते रहने के पश्चात अंत में इनके प्राण भी हर लेता है।
नौवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को बहुत धन, संपत्ति, सफलता, नेतृत्व, प्रभुता तथा किसी सरकारी अथवा निजि संस्था में उच्च पद प्रदान कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसायिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में बहुत सफल देखे जाते हैं। कुंडली के नौवें घर में शुभ उच्च के सूर्य के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक को अपने पिता अथवा पैतृक परिवार से बहुत सारी धन संपत्ति अथवा कोई बहुत सफलता से चलता हुआ व्यापार भी प्राप्त हो सकता है। इस प्रकार के शुभ उच्च सूर्य के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विदेशों में जाकर स्थापित होने में भी सफल होते हैं जबकि ऐसे कुछ अन्य जातक अपने व्यवसाय आदि की सफलता के चलते देश विदेश में प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। कुंडली के नौवें घर में शुभ उच्च का सूर्य जातक के आध्यात्मिक विकास के लिए भी बहुत प्रबल फल दे सकता है तथा इसके प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातक धार्मिक अथवा आध्यात्मिक संस्थाओं में उच्च पदों की प्राप्ति करने में भी सफल हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के नौवें घर में स्थित उच्च के सूर्य के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में असफलताओं तथा मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है विशेषतया जब ऐसा अशुभ उच्च का सूर्य कुंडली के नौवें घर में पित्र दोष का निर्माण कर रहा हो। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ उच्च के सूर्य के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने पिता अथवा पैतृक परिवार के द्वारा लिए गए आर्थिक ॠण को चुकाने का दायित्व उठाना पड़ सकता है जिसके चलते इन जातकों को अपने जीवन में बहुत लंबी अवधि के लिए आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार का अशुभ उच्च का सूर्य जातक के जीवन के बहुत से क्षेत्रों में असफलताओं की संख्या बढ़ा सकता है तथा इससे पीड़ित जातक को कई बार बहुत प्रयास करने के पश्चात भी असफलता का मुंह ही देखना पड़ता है।
दसवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक क्षेत्र में बहुत विकास तथा सफलता प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्र में बहुत बड़ी उपलब्धियां प्राप्त करके दूसरे लोगों के लिए मानदंड स्थापित करते हैं। कुंडली के दसवें घर में शुभ उच्च का सूर्य जातक के वैवाहिक जीवन के लिए भी शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा ऐसे कुछ जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में अपनी पत्नि तथा अपने परिवार के अन्य सदस्यों की सहायता से सफलता प्राप्त करते हैं। इस प्रकार के शुभ उच्च के सूर्य का प्रबल प्रभाव जातक को उसकी व्यवसायिक सफलता तथा उपलब्धियों के चलते राष्ट्रीय अथवा अंतर राष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्धि भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के दसवें घर में स्थित उच्च के सूर्य के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने व्यवसाय के माध्यम से धन की हानि तथा असफलता का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को तो अपने व्यवसाय के माध्यम से अत्याधिक धन हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में अशुभ उच्च का सूर्य जातक के वैवाहिक जीवन में भी विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को अपनी पत्नि से मतभेदों के चलते लंबे समय तक अलग रहना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है।
ग्यारहवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को अधिक अथवा बहुत अधिक मात्रा में आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जो व्यवसाय के माध्यम से भी आ सकता है तथा किसी अन्य माध्यम से भी। उदाहरण के लिए ऐसे कुछ जातकों को अपने माता पिता, भाई बहनों अथवा मित्रों से समय समय पर बहुत सा धन प्राप्त होता रहता है जिसके चलते इन जातकों के पास बहुत सा धन आता ही रहता है। कुंडली के ग्यारहवें घर में शुभ उच्च के सूर्य का प्रभाव जातक को बहुत अच्छे मित्र प्रदान कर सकता है जो जातक के जीवन के अनेक क्षेत्रों में जातक के सहायक सिद्ध होते हैं तथा जिनकी सहायता से जातक अपने जीवन में अनेक सफलताएं प्राप्त करता है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित उच्च के सूर्य के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने व्यवसायिक क्षेत्र में बहुत सी समस्याओं तथा रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने जीवन में बहुत देर तक व्यवसायिक रूप से सफल नहीं हो पाते तथा इन जातकों को अपने आप को स्थापित करने के लिए बहुत प्रयास करना पड़ता है। इस प्रकार के अशुभ उच्च के सूर्य का प्रभाव जातक अनेक प्रकार की आर्थिक हानियों से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर अपने व्यवसाय अथवा अन्य माध्यमों से धन की हानि उठानी पड़ती है।
बारहवें घर में उच्च का सूर्य👉 किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित उच्च का सूर्य शुभ होने की स्थिति में जातक को स्थायी रूप से विदेश में स्थापित करवा सकता है तथा इस प्रकार के शुभ सूर्य के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विदेशों में स्थापित होकर बहुत सफलता प्राप्त करते हैं तथा विदेशों में एक से अधिक अथवा बहुत से घर भी बनाते हैं। कुंडली के बारहवें घर में शुभ उच्च के सूर्य का प्रभाव जातक को मानसिक शांति प्रदान करता है तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास तथा साधना में रूचि भी प्रदान करता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ उच्च सूर्य के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आध्यत्मिक रूप से बहुत विकसित होने में सफलता प्राप्त करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के बारहवें घर मे स्थित उच्च के सूर्य के सूर्य के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएं आ सकतीं हैं तथा इस अशुभ प्रभाव से पीड़ित कुछ जातकों को अपनी पत्नियों से बहुत लंबे समय तक दूर रहना पड़ सकता है जिसके विभिन्न प्रकार के कारण हो सकते हैं तथा इस अलगाव के कारण ऐसे जातक अपने वैवाहिक जीवन के सुख से वंचित रह जाते हैं। कुंडली के बारहवें घर में अशुभ उच्च के सूर्य का प्रभाव जातक को बहुत अधिक व्यय अर्थात खर्च करने की आदत भी डाल सकता है जिसके चलते ऐसे जातकों को अपनी अधिक व्यय करने की आदत के कारण जीवन में अनेक बार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को जीवन में कई बार कर्ज भी लेना पड़ सकता है। कुंडली के बारहवें घर में अशुभ उच्च का सूर्य जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातकों को बहुत सा समय और धन इन रोगों के उपचार के लिए व्यतीत करना पड़ सकता है।
इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित उच्च का सूर्य कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल उच्च के सूर्य के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा उच्च का सूर्य जातक को सदा शुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे उच्च के सूर्य के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में सूर्य के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित उच्च के सूर्य के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।






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